इराक में ISIS द्वारा 39 भारतीयों के मारे जाने की पूरी कहानी

जून 2014 का में मोदी को पीएम बने एक महीने भी नहीं हुआ था, खबर आई कि इराक के मोसुल में 40 भारतीयों लापता हो गए. बाद में पता चला कि उन्हें आइएस के आतंकियों ने अगवा कर लिया है. अगवा तो कुल 80 लोग हुए थे लेकिन उनमें से 40 बांग्लादेश के थे. अब 4 साल बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कल राज्यसभा में ये खुलासा किया कि आईएस ने सभी 39 भारतीयों की हत्या कर दी है.

हरजीत मसीह की कहानी

लापता 40 हुए लेकिन हत्या 39 की हुई, आप सोच रहे होंगे कि एक कहां गायब हो गया तो आपको बता दें कि यही अकेला एक भारतीय था जो आतंकियों के चंगुल से भागने में कामयाब रहा और 39 भारतीयों के मरने की कहानी का सूत्रधार भी यही शख्स था. इस शख्स का नाम हरजीत मसीह है.

हरजीत मसीह साल 2015 में पंजाब लौटकर ये दावा किया था कि अगवा किए गए सभी 39 भारतीयों को आईएस के आतंकियों ने गोली मारकर जान ले ली है. उस वक्त सुषमा स्वराज ने हरजीत मसीह के दावे को गलत बताया था. हालांकि सुषमा स्वराज अब भी यही कह रही हैं कि हरजीत के दावे में कोई सच्चाई नहीं है वो खुद अली नाम बताकर बांग्लादेसियों के साथ मिलकर बच निकला था. हरजीत के दावे में सच्चाई हो न हो लेकिन ये बात तो बिल्कुल सच है कि 39 लोगों को आईएस के आतंकियों ने ही मारा है.

क्या करते थे मोसुल में ये भारतीय

मारे गए सभी भारतीय मोसुल में तारिक नूर अल हुदा कंपनी में काम करते थे. मरने वालों में सबसे ज्यादा पंजाब के 27, हिमाचल के 4, बिहार के 6 और पश्चिम बंगाल के 2 थे. मोसुल इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. जून 2014 में ही आईएस ने इसपर अपना कब्जा जमा लिया था. लंबी लड़ाई के पिछले साल यानी 2017 में इराक ने मोसुल को फिर से आईएस के कब्जे से मुक्त करा पाया.

कैसे पता चला ?

जून 2017 में जब मोसुल आईएस के कब्जे से मुक्त हुआ तो विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह गायब भारतीयों की जानकारी जुटाने इराक गए. दिसंबर 2017 में ही लापता भारतीयों की डीएनए टेस्टिंग हुई. मार्च 2018 में डीएनए मैच हुए और भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि हुई.

 

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