बुराड़ी केस: डरावनी बनती जा रही 11 लोगों की मौत की पूरी कहानी

30 जून तक घर में सबकुछ सामान्य था. घर के सभी सदस्य अपने अपने काम उसी अंदाज में कर रहे थे जैसे वो हमेशा से करते आए थे. हमेशा की तरह घर में रात 11 बजे के बाद पूजा भी हुई. सभी सदस्य उसमें भाग लिए लेकिन अगले दिन रविवार यानी 1 जुलाई की सुबह 6 बजे संत नगर बुराड़ी की गली नंबर 4ए के उस घर से एक ऐसी अनसुलझी कहानी जन्म लेती है जिसका न किसी को अंदाजा था न किसी ने कभी सोचा होगा. मुहल्ले का माहौल बदल चुका था. सब आवाक् थे सबके जेहन में एक सवाल था, ऐसा सवाल जो हर दिन नए नए सवालों को जन्म दे रहा है. वारदात को शुरु से अंत तक बताएंगे हर पहलू को समझाएंगे बस इसे पढ़ते जाइए.

क्या है पूरा मामला ?

उत्तरी दिल्ली के संत नगर बुराड़ी इलाके में भाटिया नाम से मशहूर 11 सदस्यों का एक परिवार करीब 20 साल से रह रहा था. 30 जून की रात परिवार के सदस्यों ने पूजा पाठ की उसके बाद क्या हुआ किसी को नहीं पता. 1 जुलाई की सुबह पड़ोस के रहने वाले गुरचरण सिंह जब भाटिया के घर में घुसे तो अंदर का दृश्य देखकर वो सन्न रह गए कुछ पल के लिए उनका दिमाग काम करना बंद कर दिया. उन्होंने देखा कि घर के अंदर परिवार के 10 लोग फंदे से लटके हुए हैं. मामला पुलिस तक पहुंचा फिर जांच पड़ताल शुरू हुई. जांच पड़ताल के नजीते भी बताएंगे पहले परिवार और घर का बैकग्राउंडर समझ लीजिए.

घर में कौन कौन रहता था?

परिवार में सबसे वृद्ध नारायण देवी थीं जिनकी उम्र करीब 77 थी. उनके दो बटे थे बड़ा बेटा भवनेश उर्फ भूप्पी (50 साल), छोटा बेटा ललित (45 साल). ललित को दिमाग में रखिएगा क्योंकि अभी तक की जांच के मुताबिक पूरे केस का सबसे अहम किरदार यही साबित हो रहा है. भवनेश की पत्नी सविता (48 साल) और ललित की पत्नी टीना (42 साल) भी साथ रहती थीं. भूप्पी की दो बेटियां और नाबालिग बेटा था. ललित का भी एक 15 साल का बेटा था. ललित की भांजी प्रियंका (33 साल) को मिलाकर परिवार में कुल 11 लोग एक साथ रहते थे. लोग बहुत धार्मिक थे हमेशा पूजा पाठ करते थे. दोनों भाइयों भवनेश और ललित घर के नीचे ही दुकान चलाते थे.

हर दिन एक नई कहानी

नारायणी देवी जो सबसे वृद्ध थीं वो दूसरे कमरे में फर्श पर मृत पाई गईं. बाकी सदस्य फंदे पर लटके हुए थे. पुलिस मामले की पूरी शिद्दत से जांच कर रही है लेकिन अभी तक किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है. मौत की वजह को सुसाइड बताया जा रहा है और इसके पीछे कई कारण हैं जिसमें सबसे बड़ा कारण है घर में एक के बाद एक एक करके 11 रजिस्टरों का मिलना. रजिस्टरों में मौत के वही सारे तरीके लिखे गए जिस तरीके से परिवार वालों की मौत हुई है. नाराणदी देवी के बड़े बेटे दिनेश सिंह चुडावत जो राजस्थान में रहते हैं उनका मुताबिक उनका परिवार पढ़ा लिखा था वो कभी आत्महत्या कर ही नहीं सकता उन्होंने कहा हत्या के पीछे कोई बड़ी साजिश है. सबसे अहम बात ये है कि उस घर में 17 जून को ललित के भांजी प्रियंका (33 साल) की सगाई थी और परिवार के सभी सदस्यों ने बड़ी खुशी खुशी उसमें भाग भी लिया था.

वैस पुलिस इसे अंधविश्वास के चक्कर में सुसाइड और हत्या दोनों पहलू से जांच कर रही है.

11 मौतें अंधविश्वास के चक्कर में आत्महत्या कैसे ?

जांच में अबतक जो जो सबूत सामने आए हैं उनके हिसाब से ये सारी मौतें आत्महत्या की तरफ इशारा करती हैं और इस आत्महत्या के पीछे मोक्ष को वजह बताया जा रहा है. अभी तक ललित जो कि नारायणी देवी का सबसे छोटा बेटा था सभी लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला बताया जा रहा है. ललित खुद भी मरने वालों में शामिल था. कुछ ऐसी भी बाते हैं जो अंधविश्वास के चक्कर में आत्महत्या की तरफ इशारा करती हैं. पहली बात कि घर की छत पर 11 पाइप लगे थे जिनमें से 7 पाइपों के मुंह मुड़े हुए हैं और चार के सीधे हैं. घर में 11 सदस्य भी थे जिसमें से 7 महिलाएं थीं और 4 पुरुष थे. दूसरी बात ये कि हादसे वाली रात ललित की पत्नी और बहन 6 स्टूल बाहर से खरीदकर लाते हुए सीसीटीवी में दिख रही हैं.

अंधविश्वास वाली मौत की सबसे रोचक कहानी

ललित कई दिन से बीमार था उसकी आवाज चली गई थी लेकिन कुछ दिन पहले ही उसकी आवाज वापस आ गई. ये भी पता चला कि आवाज आने के बाद से ललिल अपने पिता की तरह ही बोलता था. उसका कहना था कि उसके सपने में पिताजी आते हैं और उससे बात करते हैं जो निर्देश देते हैं उसे ही रजिस्टर पर लिखा जाता है. ललित का कहना थी कि पिताजी ने ही उसे ठीक किया है. यहां सबसे अहम बात जान लीजिए कि ललित के पिता की मृत्यु करीब 10 साल पहले ही हो गई थी. इसलिए ये कहानी डरावनी होती जा रही है. ललित कहता था कि पिताजी ने हमें मोक्ष का मार्ग बताया है और कहा है कि तु्म्हें एक साधना करनी होगी जिसकी वजह से तुम सबको एक बड़ी सफलता मिलेगी. ये सारी बातें रजिस्टर में दर्ज हैं. रजिस्टर में साधना के तरीकों यानी मौत के हर तरीकों को लिखा गया है. रजिस्टर में लिखी बातों की हेंड राइटिंग ललित के अलावा उसकी भांजी प्रियंका से भी मिलने की बात सामने आई है.

कुछ हालात हत्या वाले भी

1- चश्मदीद गुरचरण सिंह जब हादसे वाली सुबह ललित के घर पहुंचे तो देखा कि सारी लाशें फंदे में लटक रही हैं और घर के सभी दरवाजे खुले थे तो यहां सवाल यह उठता है कि अगर ये आत्महत्या है तो घर के सारे दरवाजे खुले कैसे थे ?
2- ललित के बड़े भाई ने बताया कि भांजी प्रियंका जो एमबीए किए हुए है उसकी सगाई वाले दिन घर में सब खुश थे. किसी शख्स ने कभी मोक्ष वाली कोई बात नहीं की. कुछ दिन बाद प्रियंका की शादी थी ऐसे में क्या पूरा परिवार आत्महत्या करेगा?
3- घर से मोक्ष और विभिन्न क्रिया-कर्म लिखे रजिस्टर मिलने से इस परिवार के तांत्रिक क्रियाओं में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने कभी घर में किसी पुजारी या तांत्रिक जैसे शख्स को आते-जाते नहीं देखा. फिर सवाल उठता है कि क्या जांच भटकाने के लिए ऐसा ये प्लॉट तैयार किया गया है ?

घर में 11 सदस्य, घर की छत पर 11 पाइपें और 5 जून 2013 से 30 जून 2018 तक लिखे गए अब तक 11 रजिस्टरों का मिलना अपने आप में ही एक दिमाग घुमा देने वाले हालात हैं. जांच दल ने पूछताछ के लिए 8 रिश्तेदारों को नोटिस जारी भी किया. नतीजे का इंतजार है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *