क्या सच में योगी को औकात से बड़ी पोस्ट मिल गई है ?

गोरखपुर में जहां योगी की तूती बोलती थी आज वहीं के लोग योगी को सिरे से नकार दिए. अब लोग क्यों नकार दिए इसका तो मीडिया अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रही है, लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल है वो है कि क्या वाकई में योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम बनने लायक थे या फिर बीजेपी यूपी में महज हिंदुत्व के चेहरे के रूप में उन्हें प्रेजेंट कर एक नया हथकंडा आजमाना चाहती थी.

अगर जमीनी हकीकत की बात करें तो खुद गोरखपुर के बहुत कम लोग ही चाहते थे कि योगी सीएम बने और अगर बनिया और सवर्णों के कुछ जातियों को छोड़ दें तो. ज्यादातर लोगों को पूरा यकीन था कि बीजेपी जीत भी जाएगी तो सीएम योगी को नहीं बनाएगी क्योंकि मनोज सिन्हा बीजेपी के पास यूपी में सीएम बनाने के लिए बेहतर विकल्प मौजूद थे.

योगी आदित्यनाथ का सीएम बनना उस वक्त भी कई लोगों को हक्का बक्का कर गया था, जैसे इस वक्त गोरखपुर में जहां करीब 3 दशक से केंद्र या यूपी में सरकार किसी की भी हो लेकिन जीत हमेशा बीजेपी की होती थी वहां योगी के सीएम रहते हार को लोग नहीं पचा पा रहे हैं.

वो एक फिल्म आई थी अमर अकबर एंथनी उसमें अमिताभ का एक डायलॉग था जो आज अखिलेश यादव के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठता है. “तूम अपुन को दस दस मारा लेकिन अपुन तुमको दो मारा पर सॉलिड मारा की नहीं ?”

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